बुधवार, 29 जून 2016

हरियाणवी स्टाइल
एक बार  रमलू भाई अपनी एक नई रिश्तेदारी में चल्या गया, साथ में उसका दोस्त भी था। नई रिश्तेदारी थी, खातिरदारी में फटाफट गरमा.गरम हलवा हाजिर किया गया। दोनों सफर में थकगे  थे, भूख भी करड़ी  लाग रही थी। हलवा आते ही दोनूंआं नै चम्मच भरी और मुंह में गरमा.गरम हलवा धर लिया। ईब इतना गरम हलवा ना निगल्या जा अर ना बाहर थू क्या जा।
बुरा हाल हो.ग्या, आंख्यां में आंसू आ.गे।
दोस्त ने हिम्मत करी और बोल्या, ‘चौधरी के होया’
रमलू  बोल्या- भाई, जब घर तैं चाल्या था तै थारी चौधरण बीमार.सी थी बस उस की याद आ गी।
 दोस्त की आंख्यां में भी और भी पाणी देख कै रमलू  बोल्या-  तेरै के होया । नाई बोल्या चौधरी  मन्नै तै लाग्गै सै चौधरण मर ली।

06 ISA LAGAI SE

05 MAINAI SADA NU