हरियाणवी स्टाइल
एक बार रमलू भाई अपनी एक नई रिश्तेदारी में चल्या गया, साथ में उसका दोस्त भी था। नई रिश्तेदारी थी, खातिरदारी में फटाफट गरमा.गरम हलवा हाजिर किया गया। दोनों सफर में थकगे थे, भूख भी करड़ी लाग रही थी। हलवा आते ही दोनूंआं नै चम्मच भरी और मुंह में गरमा.गरम हलवा धर लिया। ईब इतना गरम हलवा ना निगल्या जा अर ना बाहर थू क्या जा।
बुरा हाल हो.ग्या, आंख्यां में आंसू आ.गे।
दोस्त ने हिम्मत करी और बोल्या, ‘चौधरी के होया’
रमलू बोल्या- भाई, जब घर तैं चाल्या था तै थारी चौधरण बीमार.सी थी बस उस की याद आ गी।
दोस्त की आंख्यां में भी और भी पाणी देख कै रमलू बोल्या- तेरै के होया । नाई बोल्या चौधरी मन्नै तै लाग्गै सै चौधरण मर ली।
एक बार रमलू भाई अपनी एक नई रिश्तेदारी में चल्या गया, साथ में उसका दोस्त भी था। नई रिश्तेदारी थी, खातिरदारी में फटाफट गरमा.गरम हलवा हाजिर किया गया। दोनों सफर में थकगे थे, भूख भी करड़ी लाग रही थी। हलवा आते ही दोनूंआं नै चम्मच भरी और मुंह में गरमा.गरम हलवा धर लिया। ईब इतना गरम हलवा ना निगल्या जा अर ना बाहर थू क्या जा।
बुरा हाल हो.ग्या, आंख्यां में आंसू आ.गे।
दोस्त ने हिम्मत करी और बोल्या, ‘चौधरी के होया’
रमलू बोल्या- भाई, जब घर तैं चाल्या था तै थारी चौधरण बीमार.सी थी बस उस की याद आ गी।
दोस्त की आंख्यां में भी और भी पाणी देख कै रमलू बोल्या- तेरै के होया । नाई बोल्या चौधरी मन्नै तै लाग्गै सै चौधरण मर ली।
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